PATNA : रविवार को हुए सीमांचल एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने का जख्म अभी भरा भी नहीं था कि गुरुवार को एक और बड़ा हादसा होते होते रह गया। छपरा- सोनपुर रेलखंड पर शीतलपुर-नयागांव स्टेशन के बीच टूटी पटरी पर सद्भावना एक्सप्रेस गुजर गई। ट्रैक पेट्रोलिंग के दौरान कीमैन की नज़र टूटे ट्रैक पर पड़ी और आनन-फानन में बगल वाले गेटमैन को इसकी सूचना दी गई। सूचना मिल्न एके बाद इंजीनियरिंग विभाग की टीम स्थल पर पहुंची और टूटी पटरी को ठीक किया गया।
इधर रविवार को दुर्घटनाग्रस्त हुए सीमांचल एक्सप्रेस हादसे की जांच गुरुवार को भी सीआरएस लतीफ खान ने सोनपुर रेलमंडल सभाकक्ष में की। सीआरएस ने संबंधित पदाधिकारियों से जानकारी ली। उन्होंने हादसे से संबंधित फाइलों को खंगाला। मंगलवार को भी उन्होंने दुर्घटनास्थल का दौरा किया था और क्षतिग्रस्त बोगियों का मुआयना किया था। इस निरीक्षण के बीच उन्होंने कई बिंदुओं पर कड़ी आपत्ति भी जताई है। उनके साथ ही घटनास्थल पर मौजूद अधिकारियों ने जब उन्हें कुछ कहना चाहा तब उन्हें जांच के दौरान अपनी बात रखने को कहा गया। उन्होंने ट्रैक की क्षमता का भी जांच किया और बताया कि यहां पर 84 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली क्षमता है, पर यहां इससे ज्यादा रफ्तार वाली ट्रेनें गुजरती हैं। आपको बता दें कि रेल चालक ए के गुप्ता के अनुसार 3 फरवरी को हुए हादसे के समय सीमांचल एक्सप्रेस 107 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चल रही थी। वहीं, दूसरी तरफ सी आर एस खान ने आउटर सिग्नल की भी जांच की है। उन्होंने ट्रैक चेंज करनेवाले क्रॉसिंग प्वाइंट व स्लीपरों का भी जांच किया है। ट्रैक बदलने वाले क्रॉसिंग प्वाइंट पर बोल्ट के साथ क्लिप नहीं लगे होने पर भी उन्होंने आपत्ति जताया है।
उन्होंने बताया कि बोल्ट के साथ- साथ क्लिप का लगा होना ज़रूरी था। जांच के बाद सीआरएस ने अपने सैलून की तरफ वापस जाने के लिए जैसे ही कदम बढ़ाया था, कि बगल से किसी अधिकारी ने कुछ कहा और वे मुड़कर बगल में रखे गये दुर्घटना में रेल पटरी को ज्वाइंट करने वाले दोनों ओर की क्लिप और रेल लाइन और साथ- साथ एक बोगी को दूसरे बोगी से जोड़ने वाले टूटे हुक के पास पहुंच गए। उसके बाद दो तीन- बार उन टुकड़ों को नीचे झुककर देखा और अपने मोबाइल से उसकी फोटो खींची थी।
इधर रविवार को दुर्घटनाग्रस्त हुए सीमांचल एक्सप्रेस हादसे की जांच गुरुवार को भी सीआरएस लतीफ खान ने सोनपुर रेलमंडल सभाकक्ष में की। सीआरएस ने संबंधित पदाधिकारियों से जानकारी ली। उन्होंने हादसे से संबंधित फाइलों को खंगाला। मंगलवार को भी उन्होंने दुर्घटनास्थल का दौरा किया था और क्षतिग्रस्त बोगियों का मुआयना किया था। इस निरीक्षण के बीच उन्होंने कई बिंदुओं पर कड़ी आपत्ति भी जताई है। उनके साथ ही घटनास्थल पर मौजूद अधिकारियों ने जब उन्हें कुछ कहना चाहा तब उन्हें जांच के दौरान अपनी बात रखने को कहा गया। उन्होंने ट्रैक की क्षमता का भी जांच किया और बताया कि यहां पर 84 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली क्षमता है, पर यहां इससे ज्यादा रफ्तार वाली ट्रेनें गुजरती हैं। आपको बता दें कि रेल चालक ए के गुप्ता के अनुसार 3 फरवरी को हुए हादसे के समय सीमांचल एक्सप्रेस 107 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चल रही थी। वहीं, दूसरी तरफ सी आर एस खान ने आउटर सिग्नल की भी जांच की है। उन्होंने ट्रैक चेंज करनेवाले क्रॉसिंग प्वाइंट व स्लीपरों का भी जांच किया है। ट्रैक बदलने वाले क्रॉसिंग प्वाइंट पर बोल्ट के साथ क्लिप नहीं लगे होने पर भी उन्होंने आपत्ति जताया है।
उन्होंने बताया कि बोल्ट के साथ- साथ क्लिप का लगा होना ज़रूरी था। जांच के बाद सीआरएस ने अपने सैलून की तरफ वापस जाने के लिए जैसे ही कदम बढ़ाया था, कि बगल से किसी अधिकारी ने कुछ कहा और वे मुड़कर बगल में रखे गये दुर्घटना में रेल पटरी को ज्वाइंट करने वाले दोनों ओर की क्लिप और रेल लाइन और साथ- साथ एक बोगी को दूसरे बोगी से जोड़ने वाले टूटे हुक के पास पहुंच गए। उसके बाद दो तीन- बार उन टुकड़ों को नीचे झुककर देखा और अपने मोबाइल से उसकी फोटो खींची थी।


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