मुजफ्फरपुर क्षेत्र सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से एक प्रगतिशील जगह है. उत्तर बिहार का प्रमुख आर्थिक केन्द्र और बिहार की अघोषित राजधानी माने जाने के बावजूद इस क्षेत्र में विकास के कई अध्याय को जोड़ना अभी बाकी है. शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, कृषि और रोजगार के लिए नये-नये उद्योगों की स्थापना आज इस क्षेत्र के लोगों की समय की मांग बनकर रह गई है. इस बार का चुनाव भी कमोबेश इन्हीं मुद्दों के इर्द-गिर्द लड़ा जाएगा. जाहिर है 2019 का लोकसभा चुनाव में यहां का प्रमुख मुद्दा क्षेत्र का विकास ही है.
जॉर्ज साहब से जुड़ी यादें
स्वतंत्रता के पश्चात पहले लोकसभा चुनाव से लेकर 1971 तक मुजफ्फरपुर लोकसभा सीट कांग्रेस का अभेद्य किला था. लेकिन राम मनोहर लोहिया और जेपी का प्रभाव बढ़ने के साथ ही ये सीट समाजवादियों का सेफ जोन हो गई. प्रखर समाजवादी नेता स्वर्गीय जॉर्ज फर्नांडिस 5 बार मुजफ्फरपुर से सांसद चुने गए. 1977, 1980, 1989, 1991 और 2004 में जॉर्ज फर्नांडिस मुजफ्फरपुर से उन्होंने जीत हासिल की.
निषाद फैमिली की पकड़
जॉर्ज फर्नांडिस के अलावा कैप्टन जय नारायण निषाद 1996, 1998, 1999 और 2009 में मुजफ्फरपुर से लोकसभा के लिए चुने गए. 2014 के लोकसभा चुनाव में कैप्टन निषाद के बेटे अजय निषाद कांग्रेस के अखिलेश प्रसाद सिंह को हराकर मुजफ्फरपुर के सांसद बने. साफ है कि 1977 के बाद मुजफ्फरपुर लोकसभा सीट पर जॉर्ज फर्नांडिस और निषाद फैमिली का कब्जा रहा.
सांसद का दावा
वर्तमान सांसद अजय निषाद ने अपने कार्यकाल में 489 योजनाओं का चयन किया. इन योजनाओं के लिए सांसद निधि से 27 करोड़ 91 लाख रुपये की राशि जारी हुई. सांसद का दावा है कि मुजफ्फरपुर संसदीय क्षेत्र के अधीन आने वाले 6 विधानसभा के सभी पंचायतों में सांसद निधि से काम कराया गया.
सांसद अजय निषाद का दावा है कि उनके लोकसभा क्षेत्र में सांसद निधि के अलावा दूसरे फंड से भी विकास के काम हुए. पूरे संसदीय क्षेत्र में 1000 से ज्यादा ऑटोमेटिक सोलर लाइट लगाई गई. मझौली-कटरा होते हुए NH-527C की स्वीकृति का श्रेय सांसद ले रहे हैं. हालांकि सांसद को इसका मलाल है कि वो गोद लिए गांव यजुआर का विकास नहीं कर पाए. मुजफ्फरपुर में AIIMS की शाखा और हवाई यातायात शुरू नहीं करा पाए.
मुजफ्परपुर शहर का विहंगम दृश्य
संसद में उठाया विकास का मुद्दा
हालांकि बतौर सांसद अजय निषाद ने 5 वर्षों के दौरान लोकसभा में 195 सवाल पूछे और 20 डिबेट में भाग लिया. लोकसभा में इनकी उपस्थिति 97 प्रतिशत रही. अजय निषाद ने लोकसभा में IDPL दवा फैक्ट्री को फिर से खोलने की मांग की.
मालगाड़ी का डिब्बा बनाने वाली भारत वैगन उद्योग के रेलवे में विलय की मांग की. मुजफ्फरपुर जंक्शन पर प्लेटफॉर्म की संख्या बढ़ाने, नारायणपुर अनंत को टर्मिनल स्टेशन बनाने, बागमती नदी पर पुल बनाने, मुजफ्फरपुर से दरभंगा रेल लाईन बिछाने और हाजीपुर से छपरा और मुजफ्फरपुर से छपरा NH को फोर लेन बनाने का मुद्दा उठाया.
मुजफ्फरपुर के सांसद अजय निषाद
मुजफ्फरपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत विधानसभा की 6 सीटें आती हैं. मुजफ्फरपुर, कुढ़नी, सकरा, बोचहां, गायघाट और औराई विधानसभा क्षेत्र मुजफ्फरपुर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है. मुजफ्फरपुर लोकसभा क्षेत्र में 17 लाख 11 हजार 892 वोटर हैं. मुजफ्फरपुर लोकसभा क्षेत्र में RJD और BJP की अच्छी पकड़ है.
2015 के विधानसभा चुनाव में सकरा, गायघाट और औराई विधानसभा सीट पर RJD को जीत मिली थी. जबकि मुजफ्फरपुर और कुढ़नी विधानसभा सीट पर BJP को सफलता मिली थी. बोचहां से निर्दलीय बेबी कुमारी जीतीं थीं जो अब BJP के साथ हैं. मुजफ्फरपुर बिहार की एक हाई प्रोफाइल लोकसभा सीट है.
अहम है कास्ट फैक्टर
मुजफ्फरपुर लोकसभा क्षेत्र में कास्ट भी अहम फैक्टर होता है. हालांकि समाजवादी आंदोलन की पृष्टभूमि होने के कारण यहां के मतदाता जाति बंधन से ऊपर उठकर उम्मीदवार की योग्यता, सामाजिक और सार्वजनिक क्षेत्र में किए गए काम के आधार पर वोट करते रहे हैं. इस लोकसभा क्षेत्र में सबसे ज्यादा वैश्य समाज के वोटर हैं. उसके बाद अतिपिछड़ा और भूमिहार जाति के वोटर हैं.
यहां भूमिहार और मल्लाह जाति के उम्मीदवार चुनाव लड़ते रहे हैं, लेकिन सबसे ज्यादा वैश्य आबादी वाले मुजफ्फरपुर लोकसभा क्षेत्र का कोई वैश्य उम्मीदवार अब तक सांसद नहीं बना. इस बार मुजफ्फरपुर सीट पर सभी दलों ने पहले से ही तैयारी शुरू कर दी है. NDA के घटक दल केन्द्र और राज्य सरकार के विकास कार्यों को लेकर जनता के बीच जाने की बात कह रहे हैं.
मुजफ्फरपुर का रेलवे जंक्शन
हालांकि हाल के दिनों में मुजफ्फरपुर शहर का तेजी से विस्तार हुआ है. संकरी सड़कों और उन सड़कों पर अतिक्रमण के कारण शहर में जाम की समस्या आम है. लोगों की शिकायत है कि जाम से मुक्ति के लिए हाल के दिनों में कोशिश नहीं की गई. वहीं कई इलाकों में बाढ़ और कुपोषण की समस्या आम है.
बहरहाल महागठबंधन के घटक दल मुजफ्फरपुर के स्थानीय मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाने का मन बना रहे हैं. इनका आरोप है कि डबल इंजन की सरकार ने मुजफ्फरपुर के लिए कुछ भी नहीं किया. वहीं अजय निषाद को खुद के किए विकास कार्यों के साथ इसी साल पिता की मृत्यु के बाद सहानुभूति लहर का भी भरोसा है.
जॉर्ज साहब से जुड़ी यादें
स्वतंत्रता के पश्चात पहले लोकसभा चुनाव से लेकर 1971 तक मुजफ्फरपुर लोकसभा सीट कांग्रेस का अभेद्य किला था. लेकिन राम मनोहर लोहिया और जेपी का प्रभाव बढ़ने के साथ ही ये सीट समाजवादियों का सेफ जोन हो गई. प्रखर समाजवादी नेता स्वर्गीय जॉर्ज फर्नांडिस 5 बार मुजफ्फरपुर से सांसद चुने गए. 1977, 1980, 1989, 1991 और 2004 में जॉर्ज फर्नांडिस मुजफ्फरपुर से उन्होंने जीत हासिल की.
निषाद फैमिली की पकड़
जॉर्ज फर्नांडिस के अलावा कैप्टन जय नारायण निषाद 1996, 1998, 1999 और 2009 में मुजफ्फरपुर से लोकसभा के लिए चुने गए. 2014 के लोकसभा चुनाव में कैप्टन निषाद के बेटे अजय निषाद कांग्रेस के अखिलेश प्रसाद सिंह को हराकर मुजफ्फरपुर के सांसद बने. साफ है कि 1977 के बाद मुजफ्फरपुर लोकसभा सीट पर जॉर्ज फर्नांडिस और निषाद फैमिली का कब्जा रहा.
सांसद का दावा
वर्तमान सांसद अजय निषाद ने अपने कार्यकाल में 489 योजनाओं का चयन किया. इन योजनाओं के लिए सांसद निधि से 27 करोड़ 91 लाख रुपये की राशि जारी हुई. सांसद का दावा है कि मुजफ्फरपुर संसदीय क्षेत्र के अधीन आने वाले 6 विधानसभा के सभी पंचायतों में सांसद निधि से काम कराया गया.
सांसद अजय निषाद का दावा है कि उनके लोकसभा क्षेत्र में सांसद निधि के अलावा दूसरे फंड से भी विकास के काम हुए. पूरे संसदीय क्षेत्र में 1000 से ज्यादा ऑटोमेटिक सोलर लाइट लगाई गई. मझौली-कटरा होते हुए NH-527C की स्वीकृति का श्रेय सांसद ले रहे हैं. हालांकि सांसद को इसका मलाल है कि वो गोद लिए गांव यजुआर का विकास नहीं कर पाए. मुजफ्फरपुर में AIIMS की शाखा और हवाई यातायात शुरू नहीं करा पाए.
मुजफ्परपुर शहर का विहंगम दृश्य
संसद में उठाया विकास का मुद्दा
हालांकि बतौर सांसद अजय निषाद ने 5 वर्षों के दौरान लोकसभा में 195 सवाल पूछे और 20 डिबेट में भाग लिया. लोकसभा में इनकी उपस्थिति 97 प्रतिशत रही. अजय निषाद ने लोकसभा में IDPL दवा फैक्ट्री को फिर से खोलने की मांग की.
मालगाड़ी का डिब्बा बनाने वाली भारत वैगन उद्योग के रेलवे में विलय की मांग की. मुजफ्फरपुर जंक्शन पर प्लेटफॉर्म की संख्या बढ़ाने, नारायणपुर अनंत को टर्मिनल स्टेशन बनाने, बागमती नदी पर पुल बनाने, मुजफ्फरपुर से दरभंगा रेल लाईन बिछाने और हाजीपुर से छपरा और मुजफ्फरपुर से छपरा NH को फोर लेन बनाने का मुद्दा उठाया.
मुजफ्फरपुर के सांसद अजय निषाद
मुजफ्फरपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत विधानसभा की 6 सीटें आती हैं. मुजफ्फरपुर, कुढ़नी, सकरा, बोचहां, गायघाट और औराई विधानसभा क्षेत्र मुजफ्फरपुर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है. मुजफ्फरपुर लोकसभा क्षेत्र में 17 लाख 11 हजार 892 वोटर हैं. मुजफ्फरपुर लोकसभा क्षेत्र में RJD और BJP की अच्छी पकड़ है.
2015 के विधानसभा चुनाव में सकरा, गायघाट और औराई विधानसभा सीट पर RJD को जीत मिली थी. जबकि मुजफ्फरपुर और कुढ़नी विधानसभा सीट पर BJP को सफलता मिली थी. बोचहां से निर्दलीय बेबी कुमारी जीतीं थीं जो अब BJP के साथ हैं. मुजफ्फरपुर बिहार की एक हाई प्रोफाइल लोकसभा सीट है.
अहम है कास्ट फैक्टर
मुजफ्फरपुर लोकसभा क्षेत्र में कास्ट भी अहम फैक्टर होता है. हालांकि समाजवादी आंदोलन की पृष्टभूमि होने के कारण यहां के मतदाता जाति बंधन से ऊपर उठकर उम्मीदवार की योग्यता, सामाजिक और सार्वजनिक क्षेत्र में किए गए काम के आधार पर वोट करते रहे हैं. इस लोकसभा क्षेत्र में सबसे ज्यादा वैश्य समाज के वोटर हैं. उसके बाद अतिपिछड़ा और भूमिहार जाति के वोटर हैं.
यहां भूमिहार और मल्लाह जाति के उम्मीदवार चुनाव लड़ते रहे हैं, लेकिन सबसे ज्यादा वैश्य आबादी वाले मुजफ्फरपुर लोकसभा क्षेत्र का कोई वैश्य उम्मीदवार अब तक सांसद नहीं बना. इस बार मुजफ्फरपुर सीट पर सभी दलों ने पहले से ही तैयारी शुरू कर दी है. NDA के घटक दल केन्द्र और राज्य सरकार के विकास कार्यों को लेकर जनता के बीच जाने की बात कह रहे हैं.
मुजफ्फरपुर का रेलवे जंक्शन
हालांकि हाल के दिनों में मुजफ्फरपुर शहर का तेजी से विस्तार हुआ है. संकरी सड़कों और उन सड़कों पर अतिक्रमण के कारण शहर में जाम की समस्या आम है. लोगों की शिकायत है कि जाम से मुक्ति के लिए हाल के दिनों में कोशिश नहीं की गई. वहीं कई इलाकों में बाढ़ और कुपोषण की समस्या आम है.
बहरहाल महागठबंधन के घटक दल मुजफ्फरपुर के स्थानीय मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाने का मन बना रहे हैं. इनका आरोप है कि डबल इंजन की सरकार ने मुजफ्फरपुर के लिए कुछ भी नहीं किया. वहीं अजय निषाद को खुद के किए विकास कार्यों के साथ इसी साल पिता की मृत्यु के बाद सहानुभूति लहर का भी भरोसा है.




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